जब अर्जुन को अपनी धनुर्विद्या पर अभिमान हो गया तब हनुमान जी ने प्रकट होकर उनको विनम्रता का पाठ पढ़ाया।
अर्जुन अपनी तीर्थयात्रा के समय रामेश्वरम पहुँचे और श्रीराम सेतु को देखकर सोचने लगे कि श्रीराम इतने प्रतिभाशाली धनुर्धर थे, उनको इस सेतु को बनाने के लिए वानरों की सहायता क्यों लेनी पड़ी।
अर्जुन के अभिमान का अनुमान लगने पर बजरंगबली एक वानर के रूप में प्रकट ... Show More